कोरोना काल में मजबूरी याँ हो रहा मजाक
कोरोना काल में मजबूरी याँ हो रहा मजाक
मझबूर पुलिस भी करे तो क्या करे
बरेली। कोरोना की रोकथाम के लिये लॉक तो लगाया गया है पर जनता अभी भी इसको मजाक में ले रही है। रात भर डियूटी पर लगी पुलिस भी कशमकश में है कि इसको मजबूरी समझे याँ मजाक।
अगर सख्ती करती है तो जनता तरह तरह के आरोप लगाने से नहीं चूकती एक दृश्य सामने आया कुतुबखाना चौराहे का जहां रात के समय मौजूद प्रदीप सैनी के साथ पुलिसकर्मी अपने ड्यूटी कर रहे थे तभी उन्होंने एक ऑटो को रोक लिया जब देखा एक ऑटो के अंदर ड्राइवर सहित बैग लेकर 7 लोग सवार थे ऑटो को खचाखच भरे हुए देखकर जब पूछा गया तो मौजूदा सवारियों ने बताया कि वह जंक्शन जा रही है परंतु हैरान करने वाली बात यह थी कि किसी भी व्यक्ति की कोरोना जांच नहीं हुई थी। और एक ऑटो में सात सवारी शायद एक भी संक्रमित होने पर तबाही मचा सकती थीं। दूसरी तरफ एक्टिवा पर जा रहे एक व्यक्ति को रोका गया तो उस व्यक्ति ने पुलिस के रोकने पर नगर निगम का मास्क लगा लिया और उसकी पत्नी ने तुरंत दुपट्टे से अपना मुंह ढक लिया परंतु पुलिस से बचने के चक्कर में यह भूल गए की एक्टिवा पर आगे खड़ी लगभग 5 से 6 वर्ष की बच्ची बिना मास्क के थी ऐसे में अगर पुलिस किसी पर शक्ति करती है तब तमाम सिफारिशें आने लगती हैं आखिर पुलिस करें भी तो क्या करें।